बहुत गरीब आईएएस अधिकारी? IAS Officers from poor background

आज के समय में हर कोई एक अच्छी नौकरी पाना चाहता है जिसके लिए वह कड़ी मेहनत करता है। जहां बात अच्छी नौकरी की होती है वहां सबसे ऊपर UPSC होता है।

यदि आप भी एक अच्छी नौकरी पाना चाहते हैं तो आपको भी UPSC की तैयारी बहुत मन से और लगन से करनी चाहिए। परंतु बहुत बार ऐसा होता है कि विद्यार्थी आर्थिक रूप से इतनी समर्थ नहीं होते कि वह अच्छी पढ़ाई कर सकें। तो ऐसे में वह UPSC की तैयारी छोड़ने का सोचते हैं।

आज के इस article में मैं आपको कुछ ऐसे IAS officer के बारे में बताऊंगी जो आर्थिक रूप से असमर्थ होने के बाद भी अपने सपने को साकार करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं और वह सफल भी हुए हैं।

हम जानेंगे कुछ बहुत गरीब IAS अधिकारियों के बारे में। तो इस article को बड़े ही ध्यानपूर्वक पढ़ें और हमारे साथ अब तक बने रहे।

बहुत गरीब आईएएस अधिकारी?

यदि बात की जाए बहुत गरीब IAS officer की तो ऐसे कई सारे IAS officer हैं जिन्होंने बहुत संघर्ष करके अपने IAS बनने का सपना पूरा किया है। ऐसे बहुत से IAS officer है जो कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी आज सफलता के मुकाम पर हैं और हम सभी के लिए Inspiration है। आज के इस article में हम ऐसे ही IAS officer के बारे में जानेंगे,

  • IAS IRA Singhal
  • IAS Tanu Jain
  • IAS Varun Baranwal
  • IAS Komal Ganatra
  • IAS Srushti Deshmukh
  • IAS Arjun Gowda

 

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आज के इस article में हम जानेगे।

  • Varun Baranwal
  • Komal Ganatra

 

  • Varun Baranwal

 

महाराष्ट्र के पालघर जिले के छोटे से शहर बोईसर के एक IAS officer वरुण बरनवाल पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। वरुण के पिता साइकिल मैकेनिक थे, जो साइकिल repairing की एक छोटी सी दुकान चलाते थे।

उनके पिता ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कड़ी मेहनत की। वरुण कुमार बरनवाल ने 2006 में अपने पिता को खो दिया। अपने पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद, परिवार का आर्थिक बोझ उनके युवा कंधों पर आ गया क्योंकि वह अपने परिवार में सबसे बड़े पुरुष थे। वरुण के पिता की साइकिल मरम्मत की दुकान थी, जो कि उनके परिवार के आय का एकमात्र स्रोत था और उनके पिता की मृत्यु के बाद वरुण ने अपने पिता की दुकान का प्रभार लेने और अपने परिवार की देखभाल करने का फैसला किया था।

इन सबके बीच वरुण बरनवाल ने 10वीं की परीक्षा में अपनी कक्षा में Top किया था। जब वरुण की मां ने उनके पढ़ने के जुनून और जीवन में कुछ करने की इच्छा को देखा तो उन्होंने दुकान की जिम्मेदारी ली और उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा।

वरुण कुमार की परेशानियों के समय उनकी सहायता एक ऐसे व्यक्ति ने की जिन्हों ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। बहुत सारा श्रेय अपने दिवंगत पिता के मित्र डॉ. काम्पली को जाता है, जिन्होंने उनके निधन से पहले उनके पिता का इलाज किया था। डॉ. काम्पली ने न केवल कॉलेज की शुरुआती fees में मदद की बल्कि बाद में उनके IAS की पढ़ाई में भी काफी सहायता की।

अपनी स्कूली शिक्षा पास करने के बाद, वरुण ने Engineering की तैयारी करने का फैसला किया। वरुण ने MIT College पुणे में प्रवेश लिया और कॉलेज से छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए अपने engineering course के पहले semester में कड़ी मेहनत की। एक स्कूल छात्रवृत्ति का उपयोग करके, वह अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने में सक्षम रहे।

वरुण के दोस्तों ने उनकी मदद की और उनके लिए किताबें लाए, और उनके मुश्किल समय में उनका साथ दिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई। उनका परिवार चाहता था कि वह अपनी मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी जारी रखें, लेकिन वरुण सिविल सेवाओं के साथ आगे बढ़ना चाहते थे। परीक्षा की तैयारी के लिए उन्हें गैर सरकारी संगठनों से मदद मिली जिन्होंने उन्हें किताबें उपलब्ध कराईं।

सबकी मदद से वह परीक्षा पास करने में सफल रहा और IAS officer बन गया। गरीबी की जिंदगी को सबक के तौर पर देखने वाले बरनवाल ने UPSC IAS 2016 की परीक्षा में 32वां रैंक हासिल कि और IAS अफसर बने। पढ़ने की लगन और जीवन में कुछ करने की चाहत ने वरुण बरनवाल को वह सफलता दिलाई जिसकी ख्वाहिश भारत के कई युवा करते हैं।

 

  • Komal Ganatra

इनकी शादी एक N.R.I. से हुई थी, जो कि शादी के 15 दिन बाद ही Komal Ganatra को छोड़कर चला गया था। उसके बाद इन्होंने civil service करने का सोचा, जिसमें की यह सफल हुई। Komal Ganatra जो कि Administrative in Ministry of Defense officer के रूप में कार्य कर रही है। इनकी बचपन की पढ़ाई Gujarati Medium से हुई। इनकी मातृभाषा गुजराती है जो कि इनके लिए इनकी UPSC exam मे सहायक बनी।

इन्हों ने पूरा UPSC exam Gujarati Medium में दिया और जिस साल इन्होंने UPSC exam clear किया उस साल यह गुजराती मीडियम की टॉपर रही। इनके पापा टीचर थे। इनकी मां ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी, इसके साथ ही उनके दो छोटे भाई थे जो कि अपने अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रहे थे।

उनकी family से इन्हें पूरा Support मिला। इनके पापा ने इन्हें 4 साल की उम्र से ही UPSC के बारे में बताना शुरू कर दिया था। इन्होंने open university से Graduation किया। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग University से 3 भाषाओं में Graduation किया। इसके बाद इन्होंने distance learning के माध्यम से अपनी Engineering भी पूरी की। इन्होंने अपनी शुरुआत एक टीचर के रूप में केवल ₹1000 से की थी, उस समय यहां competitive exam की तैयारी कर रही थी।

इन्होंने Gujarat Public Service Commission का Mains clear कर लिया था, जिसके बाद इनकी शादी है कि NRI से हो गई। परंतु उनके husband नहीं चाहते थे कि यह UPSC का Interview दे। इन्होंने अपनी शादी में काफी उतार-चढ़ाव देखें, काफी संघर्ष किया और फिर इन्होंने खुद की identity बनाने का सोचा।

फिर इन्होंने दोबारा से UPSC की preparation शुरू की। इन्होंने अपने Sustainability के लिए एक सरकारी टीचर की नौकरी की जिसकी तनख्वाह केबल 5000 थी, यह नौकरी उन्हें 2 साल के बाद लगी थी। यह अपने home town से 40 किलोमीटर दूर एक गांव में रहने चली गई, जहां की बस्ती 15000 से भी कम थी।

जहां पर इन्हें ना तो अंग्रेजी अखबार की सुविधा मिली और ना ही smartphone या Internet की सुविधा मिली। हर saturday और sunday को इनकी छुट्टी रहती थी जिसमें कि यह 300 किलोमीटर दूर ahemdabad अपना subject सीखने जाती थी।

इन्होंने अपनी पूरी UPSC की तैयारी के दौरान कोई भी छुट्टी नहीं ली। और फिर इन्होंने मुंबई में अपना Mains exam clear किया और फिर दिल्ली में Interview दे कर यह एक सफल officer बनी।

निष्कर्ष

आज के इस article में हमने जाना बहुत गरीब आईएसofficer के बारे में। साथ ही विस्तार से हमने जाना Varun Baranwal और Komal Ganatra के बारे में।

आशा है आज के इस article को पढ़कर आपके मन में बहुत गरीब IAS officer से जुड़े जो भी सवाल होंगे, उन सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे।

 

 

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