ग्राम प्रधान का कार्यकाल कितना होता है? | Gram pradhan ka karyakal kitna hota hai

आज हम जानेंगे कि ग्राम प्रधान का कार्यकाल क्या है? ग्राम प्रधान का कार्यकाल कितना होता है? (Gram pradhan ka karyakal kitna hota hai)

ग्राम प्रधान का कार्यकाल ‘5 वर्षो ‘ का होता है। गांव में चुनाव करवाकर ग्राम प्रधान को 5 साल के लिए चुना जाता है। प्रत्येक 5 वर्ष की अवधि में ग्राम प्रधान के लिए चुनाव होता है जिसमें यदि पिछले ग्राम प्रधान ने गांव वालों और गांव के लिए अच्छा कार्य किया है तो उसे फिर से ग्राम प्रधान के रूप में चुना जा सकता है।

ग्राम प्रधान क्या है?

सीधे शब्दों में गांव के मुखिया या सरपंच को ही ग्राम प्रधान कहा जाता है। किसी भी गांव का कोई एक मुखिया या सरपंच होता है जोकि आधिकारिक कार्यों में उस गांव का संचालन करता है। 1973 में संवैधानिक संशोधन में पंचायती राज प्रणाली को अपनाया गया था। किसी भी गांव में जहां की जनसंख्या 1000 से अधिक है एक ग्राम पंचायत कहलाती है जोकि एक चुने हुए अध्यक्ष(ग्राम प्रधान/मुखिया/सरपंच)द्वारा संचालित होती है। ग्राम प्रधान या मुखिया का काम ग्रामीणों की समस्या और गांव से संबंधित कार्यों को देखना होता है। 1000 से कम आबादी वाले गांवों को आसपास के गांवों से मिलाकर एक ग्राम पंचायत बनाई जाती है।

ग्राम प्रधान का चुनाव कैसे होता है?

जाहिर तौर पर,किसी गांव के ग्राम प्रधान या मुखिया या सरपंच का चुनाव मतदान करवाकर चुनाव के द्वारा ही किया जाता है। चुनाव में चुने जाने वाला वहां की जनता का प्रतिनिधि होता है। किसी गांव के ग्राम प्रधान के रूप में चुने जाने पर, उप प्रधान तथा ग्राम पंचायत समिति के साथ मिलकर वह उस गांव की और जनता की समस्याओं को हल करने में कार्यरत रहते हैं। ग्राम प्रधान का चुनाव अन्य किसी चुनाव की तरह ही होता है।

गांव का जो भी व्यक्ति ग्राम प्रधान या सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने की अच्छा लगता है उसे एक निर्धारित समय अवधि के अंदर जिले के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आवेदन पत्र या पर्चा प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद निर्वाचन कार्यालय द्वारा प्रत्येक प्रत्याशी को एक चुनाव चिन्ह प्रदान किया जाता है।

चुनाव में खड़े होने वाले सभी प्रत्याशी चुनाव प्रचार करते हैं जो कि निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देश के अनुसार ही किया जाता है। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित तिथि को उस गांव में मतदान कराया जाता है जिसके बाद मतों की गणना की जाती है और नियमानुसार जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक मत प्राप्त होता है उसे निर्वाचन अधिकारी के द्वारा प्रमाण पत्र देकर ग्राम प्रधान के तौर पर नियुक्त किया जाता है।

ग्राम पंचायत समिति के सदस्यों में से ही किसी एक सदस्य को बहुमत के आधार पर उपप्रधान के तौर पर चुना जाता है जिसका कार्य ग्राम प्रधान की अनुपस्थिति में वहां के कामों की देखभाल करना होता है। ग्राम पंचायत समिति के किसी सदस्य द्वारा अपने कार्य को ठीक तरीके से नहीं करने पर उसे उस समिति से हटाया भी जा सकता है।

ग्राम प्रधान बनने के लिए योग्यता?

ग्राम प्रधान के पद पर व्यस्त होने के लिए योग्यता में आपको आठवीं पास होना जरूरी होता है, यानी यदि आप ग्राम प्रधान बनना चाहते हैं तो आपका आठवीं पास होना जरूरी है।वहीं पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य बनने के लिए आपका दसवीं उत्तीर्ण होना जरूरी होता है।

ग्राम प्रधान को क्या-क्या कार्य करने होते हैं?

मुख्य रूप से ग्राम प्रधान का कार्य अपने गांव का विकास देखना, गांव के लोगों को किसी प्रकार की समस्या होने पर उनका हल करना ही होता है। गांव के विकास के लिए कई सारे कार्यों का निष्पादन करना होता है और इन कार्यों को करने में ग्राम प्रधान की मुख्य भूमिका रहती है।

एक ग्राम प्रधान (मुखिया/सरपंच) के तौर पर वह ग्राम पंचायत तथा ग्राम सभा की बैठक बुलाकर उस बैठक की कार्यवाही को  नियंत्रित करता है।  इस बैठक में गांव से या गांव के लोगों से संबंधित समस्याओ आदि पर कार्यवाही की जाती है।

समस्याओं आदि का हल करने के साथ-साथ यह ग्राम प्रधान का ही कार्य होता है कि वह ग्राम पंचायतों के लिए सरकार द्वारा निर्देशित निर्माण कार्य, विकास योजनाओं व अन्य कार्यक्रमों की जानकारी रखें, इनसे संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर उसे गांव के लोगों तक पहुंचाएं जिससे गांव वासी उन योजनाओं से लाभान्वित हो सके।

ग्राम पंचायत में प्रशासनिक कार्य समिति, निर्माण कार्य समिति, नियोजन कार्य समिति, चिकित्सा स्वास्थ्य समिति, शिक्षा समिति, जल प्रबंधन समिति आदि जैसी समितियों का काम गांव के विकास कार्य से जुड़ा होता है इन समितियों का कार्य भी ग्राम प्रधान के द्वारा हीं कराया जाता है।

किसी गांव में के ग्राम पंचायत द्वारा ही कृषि कार्य की रूपरेखा तैयार की जाती है। कृषि से संबंधित व्यवधानओं को  सही करने का प्रयास किया जाता है, इसमें भी ग्राम प्रधान शामिल होता है।

शिक्षा के क्षेत्र में गांव के विकास के लिए गांव में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण करना वार उन्हें स्कूलों में आवश्यक चीजों  को उपलब्ध करवाने के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क करना आदि जैसे कार्यों की जिम्मेदारी भी ग्राम प्रधान की होती है।

ग्राम प्रधान के अन्य कार्यों में युवा कल्याण संबंधी कार्यों को कराना, ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा स्वास्थ्य संबंधित कार्यों की देखरेख करना, राजकीय नलकूपों की मरम्मत और उनका रखरखाव करना, गांव के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास संबंधित कार्य करना, सभी प्रकार की उपलब्ध पेंशन सुविधाओं को गांव के नागरिकों के लिए उपलब्ध कराना आदि शामिल है। गांव में राशन की दुकान का आवंटन का कार्य भी ग्राम प्रधान का ही होता है।

उपयुक्त कार्यों के अलावा पंचायती राज्य संबंधी ग्राम स्तरीय कार्यों को देखने का काम भी इन्हीं का होता है। ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाली सभी कच्ची और पक्की सड़कों का निर्माण से लेकर उनके रखरखाव के देखभाल का काम भी ग्राम प्रधान  का होता है।

Conclusion

भारत देश की संपूर्ण जनसंख्या का 70% के लगभग का भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है। जनसंख्या के इतने बड़े भाग का प्रशासन स्थापित करने के लिए देश के संविधान के अनुच्छेद 246 के अंतर्गत पंचायती राज का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत क्षेत्रों  का ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के रूप में गठन किया जाता है। किसी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष के रूप में ग्राम प्रधान को चुना जाता है जोकि इससे संबंधित सभी कार्यों का संचालन करता है।

इस लेख में हमने जाना कि ग्राम प्रधान क्या होता है?, एक ग्राम प्रधान को क्या-क्या कार्य करने होते हैं?, ग्राम प्रधान का चुनाव किस प्रकार से किया जाता है? और किसी गांव के ग्राम प्रधान का कार्यकाल कितने समय का होता है।

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