BSTC कितने साल का होता है? | Bstc kitne saal ka hota hai

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आज हम जानेंगे कि बीएसटीसी (BSTC) कितने साल का होता है? (Bstc kitne saal ka hota hai) या बीएसटीसी कोर्स कितने वर्ष का होता है?

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बीएसटीसी (BSTC) का पूरा नाम बेसिक स्कूल ट्रेंनिंग सर्टिफिकेट (basic school training certificate) है, जिसे हिंदी में बुनियादी विद्यालय शिक्षण प्रमाण पत्र कहा जाता है।

सामान्य तौर पर बीएसटीसी का कोर्स 12वीं पूरी करने के बाद किया जाता है यानी इसके लिए ग्रेजुएशन जैसी कोई डिग्री होना जरूरी नहीं है, हालांकि यदि कोई ग्रेजुएशन  या अन्य कोई कोर्स  करने के बाद भी इसे करना चाहता है तो वह कर सकता है।

यह 2 वर्ष की अवधि में पूरा होने वाला एक कोर्स है जिसमें अभ्यर्थियों को प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है। यदि आप एक प्राइमरी टीचर के रूप में कार्य करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको बीएसटीसी कर सकते हैं। Science, arts या commerce किसी भी स्ट्रीम का विद्यार्थी इसके  लिए अप्लाई कर सकता है।

बीएसटीसी कितने साल का होता है? (BSTC kitne saal ka hota hai)

बीएसटीसी कितने साल का होता है?

BSTC का कोर्स ‘2 वर्ष ‘ का होता है।

यह राजस्थान सेक्टर में काफी प्रसिद्ध कोर्स है। यहां इसे प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक बनने के लिए एक आवश्यक योग्यता के रूप में देखा जाता है।

BSTC को D.EL.ED के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2019 से सरकार द्वारा बीएसटीसी का नाम बदलकर D.EL.ED कर दिया गया है। D.EL.ED का पूरा नाम diploma in  elementary education है।

BSTC के लिए योग्यता

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बीएसटीसी का कोर्स करने के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता में विद्यार्थी का किसी भी स्ट्रीम से 12 वीं पास होना जरूरी है। यदि बात की जाए 12वीं में आए प्रतिशत की तो सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए 50% अंकों के साथ बारहवी उत्तीर्ण होना चाहिए। अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी SC और ST को इसमें कुछ छूट दी जाती है उनके लिए 12वीं में 45% अंक पर्याप्त होते हैं।

आयु सीमा में, अभ्यार्थी की आयु 28 वर्ष से अधिक की नहीं होनी चाहिए। विशेष वर्ग से belong करने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में निर्धारित छूट दी जाती है।

BSTC कैसे करें

सबसे पहले तो बीएसटीसी का कोर्स करने के लिए आपका 12 वीं पास होना आवश्यक है। यदि आप 12वीं पास कर चुके हैं, तब आपको इसमें प्रवेश के लिए बीएसटीसी का एंट्रेंस एग्जाम देकर उसमें पास होना होता है। इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए हर साल बीएसटीसी का एंट्रेंस एग्जाम आयोजित होता है जिसे पास करने वाले अभ्यार्थियों की उसके बाद काउंसलिंग होती है। इसके लिए निकाले गए मेरिट लिस्ट के आधार पर अभ्यार्थियों को कॉलेज प्राप्त होता है।

प्रत्येक बार चार से पांच काउंसलिंग सूची जारी की जाती है। यदि बात करें बीएसटीसी के एंट्रेंस एग्जाम की तो बीएसटीसी का एंट्रेंस एग्जाम हर साल मई में आयोजित किया जाता है जिससे किसी भी विद्यार्थी के पास 12वीं की परीक्षाएं देने के बाद इस एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने के लिए समय होता है।

यदि कुछ महीने इस एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी अच्छी तरीके से की जाए तो पहले ही काउंसलिंग लिस्ट में नाम आकर अभ्यार्थी को बीएसटीसी में एडमिशन मिल सकता है। इसीलिए बीएसटीसी का कोर्स करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए अच्छे तरीके से इसकी तैयारी करना फायदेमंद रहता है।

बीएसटीसी के की प्रवेश परीक्षा में जनरल अवेयरनेस आफ राजस्थान, मेंटल एबिलिटी, टीचिंग एप्टीट्यूड, हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत जैसे विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

BSTC से लाभ

शिक्षण क्षेत्र का एक प्रमुख कोर्स होने के कारण बीएसटीसी करने के कई फायदे होते हैं।

बीएसटीसी यानी बेसिक स्कूल टीचिंग सर्टिफिकेट के नाम से ही पता चलता है कि यह कोर्स प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने की योग्यता के लिए है। इसे करने से आप किसी सरकारी स्कूल में प्राइमरी कक्षाओं के अध्यापक के तौर पर नियुक्त हो सकते हैं।

इस कोर्स को करने पर आपको अध्यापन के लिए एक सरकारी सर्टिफिकेट मिल जाता है, जिससे आपको दूसरे जगहों पर भी फायदा मिल सकता है। अध्यापन के लिए आपके पास एक सरकारी सर्टिफिकेट होना आपके लिए फायदेमंद होता है।

इस कोर्स के किए होने पर आपके लिए प्राइवेट स्कूलों में भी टीचिंग की जॉब मिलने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों में भी अच्छे शिक्षकों की मांग रहती है एवं इसके किए होने पर इसका सर्टिफिकेट ऐसी जगहों पर आपका महत्व बढ़ा देता है।

अन्य विकल्पों में बीएसटीसी का कोर्स करने के बाद आप b.ed का कोर्स भी कर सकते हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में आप उच्च पदों पर अध्यापन का कार्य करने के योग्य बनते हैं।

BSTC करने के बाद जॉब

प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने में रुचि रखने वालों को ही इसे करना चाहिए। बीएसटीसी का कोर्स मुख्य रूप से प्राइमरी स्कूलों में प्राइमरी टीचर बनने के लिए ही किया जाता है। BSTC पूरा कर चुका कोई भी अभ्यार्थी सीधे सरकारी स्कूलों में प्राइमरी टीचर के तौर पर नियुक्त नहीं हो सकता है, इसके लिए उसे रीट परीक्षा जो कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली थर्ड ग्रेड भर्ती परीक्षा है, पास करना पड़ता है। इसकी प्रक्रियाओं से गुजर कर एक अभ्यार्थी किसी सरकारी स्कूल में प्राइमरी टीचर के  तौर पर नियुक्त होता है।

Conclusion

आज के समय में जहां छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं, वहीं बहुत से छात्र ऐसे भी होते हैं जो teaching profession में अपना करियर बनाना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं यानी कक्षा 1 से लेकर पांचवी तक को पढ़ाने के लिए प्राइमरी शिक्षकों को नियुक्त किया जाता है।

एक प्राइमरी शिक्षक के तौर पर नियुक्त होने के लिए आपको बीएसटीसी यानी बेसिक स्कूल टीचिंग सर्टिफिकेट करने की आवश्यकता होती है। बीएसटीसी का कोर्स करके आप सरकारी स्कूलों में एक प्राइमरी शिक्षक के तौर पर पढ़ाने के योग्य हो जाते हैं।

बीएसटीसी को लेकर अभ्यार्थियों में इससे संबंधित कई सवाल होते हैं जैसे यह कब की जाती है, इसमें दाखिला कैसे लेते हैं, इसके लिए फॉर्म कब भरा जाता है, इसका एंट्रेंस एग्जाम कैसा होता है इत्यादि। आज इस लेख में हमने जाना कि बीएसटीसी क्या है, इसे कैसे करें, इसके लिए योग्यताएं क्या होनी चाहिए, इसे करने के बाद क्या विकल्प खुलते हैं, इस कोर्स को करने से क्या-क्या फायदे हैं इत्यादि।

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